vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा
»
श्लोक 40-41h
श्लोक
9.36.40-41h
तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य सहिता: सर्वदेवता:॥ ४०॥
प्रययुस्तत्र यत्रासौ त्रितयज्ञ: प्रवर्तते।
अनुवाद
बृहस्पतिजी के ये वचन सुनकर सभी देवता एक साथ उस स्थान पर गए जहाँ त्रितमुनिका यज्ञ हो रहा था।
After listening to these words of Brihaspatiji, all the gods together went to the place where the Tritamunika Yagna was being performed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×