श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  9.36.37-38h 
वर्तमाने महायज्ञे त्रितस्य सुमहात्मन:॥ ३७॥
आविग्नं त्रिदिवं सर्वं कारणं च न बुद्धॺते।
 
 
अनुवाद
महात्मा त्रिताक का महान यज्ञ प्रारम्भ होने पर सम्पूर्ण स्वर्ग में हलचल मच गई, किन्तु कोई भी इसका कारण नहीं समझ सका। 37 1/2
 
When the great Yajna of Mahatma Tritaka was started, the entire heaven became agitated, but nobody could understand the reason for it. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)