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mahabharat 9.36.33: ऋषि ने बालू से भरे हुए कुएँ में जल की कल्पना की और अपने संकल्प से उसमें अग्नि की स्थापना की तथा होता आदि के स्थान पर स्वयं को स्थापित किया ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.36.33 
पांसुग्रस्ते तत: कूपे विचिन्त्य सलिलं मुनि:।
अग्नीन् संकल्पयामास होतॄनात्मानमेव च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि ने बालू से भरे हुए कुएँ में जल की कल्पना की और अपने संकल्प से उसमें अग्नि की स्थापना की तथा होता आदि के स्थान पर स्वयं को स्थापित किया ॥33॥
 
The sage imagined water in the sand-filled well and by his resolve established fire in it and in place of Hota etc. he established himself. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)