vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा
»
श्लोक 32
श्लोक
9.36.32
स एवमभिनिश्चित्य तस्मिन् कूपे महातपा:।
ददर्श वीरुधं तत्र लम्बमानां यदृच्छया॥ ३२॥
अनुवाद
इस प्रकार विचार करते समय महातपस्वी त्रिता ने कुएँ में एक लता देखी जो वहाँ फैली हुई थी।
While contemplating in this manner, the great ascetic Trita saw a creeper in the well which had happened to be spreading there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×