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mahabharat 9.36.32: इस प्रकार विचार करते समय महातपस्वी त्रिता ने कुएँ में एक लता देखी जो वहाँ फैली हुई थी।   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  9.36.32 
स एवमभिनिश्चित्य तस्मिन् कूपे महातपा:।
ददर्श वीरुधं तत्र लम्बमानां यदृच्छया॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करते समय महातपस्वी त्रिता ने कुएँ में एक लता देखी जो वहाँ फैली हुई थी।
 
While contemplating in this manner, the great ascetic Trita saw a creeper in the well which had happened to be spreading there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)