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mahabharat 9.36.3: वहाँ धर्मनिष्ठा से महातपस्वी त्रितमुनि निवास करते थे। उस महात्मा ने कुएँ में रहकर सोमरस का पान किया।   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.36.3 
तत्र धर्मपरो भूत्वा त्रित: स सुमहातपा:।
कूपे च वसता तेन सोम: पीतो महात्मना॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ धर्मनिष्ठा से महातपस्वी त्रितमुनि निवास करते थे। उस महात्मा ने कुएँ में रहकर सोमरस का पान किया।
 
The great ascetic Tritmuni lived there with devotion to religion. That great soul drank Soma while staying in the well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)