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mahabharat 9.36.29: हे राजन! तब उन दोनों भाइयों ने पशुओं के लोभ के कारण महातपस्वी त्रित को उस धूल से भरे हुए जलहीन कुएँ में छोड़ दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  9.36.29 
भ्रातृभ्यां पशुलुब्धाभ्यामुत्सृष्ट: स महातपा:।
उदपाने तदा राजन् निर्जले पांसुसंवृते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तब उन दोनों भाइयों ने पशुओं के लोभ के कारण महातपस्वी त्रित को उस धूल से भरे हुए जलहीन कुएँ में छोड़ दिया।
 
O King! Due to greed for the animals, those two brothers then left the great ascetic Trita in that waterless well which was filled with dust.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)