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mahabharat 9.36.1: वैशम्पायन कहते हैं: उस चमासोद्भेद तीर्थ को छोड़कर, बलराम सरस्वती नदी के जल में स्थित, महाप्रतापी त्रित मुनि के उदपन तीर्थ में गए।   |   mahabharat अध्याय 9.36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 36: उदपानतीर्थकी उत्पत्तिकी तथा त्रित मुनिके कूपमें गिरने, वहाँ यज्ञ करने और अपने भाइयोंको शाप देनेकी कथा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.36.1 
वैशम्पायन उवाच
तस्मान्नदीगतं चापि ह्युदपानं यशस्विन:।
त्रितस्य च महाराज जगामाथ हलायुध:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: उस चमासोद्भेद तीर्थ को छोड़कर, बलराम सरस्वती नदी के जल में स्थित, महाप्रतापी त्रित मुनि के उदपन तीर्थ में गए।
 
Vaishmpayana says: After leaving that Chamasodbhed Tirtha, Balarama went to the Udapana Tirtha of the illustrious Trita Muni, which is situated in the waters of the Saraswati river.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)