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mahabharat 9.35.86: हे जमींदार! इसीलिए तो सब लोग उसे प्रभासतीर्थ के नाम से जानते हैं; क्योंकि उसमें गोता लगाकर चन्द्रमा ने उत्तम प्रकाश प्राप्त किया था ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.35.86 
अतश्चैतत् प्रजानन्ति प्रभासमिति भूमिप।
प्रभां हि परमां लेभे तस्मिन्नुन्मज्ज्य चन्द्रमा:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
हे जमींदार! इसीलिए तो सब लोग उसे प्रभासतीर्थ के नाम से जानते हैं; क्योंकि उसमें गोता लगाकर चन्द्रमा ने उत्तम प्रकाश प्राप्त किया था ॥86॥
 
Landlord! That is why everyone knows him by the name of Prabhastirtha; Because by diving into it the moon had obtained excellent light. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)