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mahabharat 9.35.85: महाराज! उत्तम प्रभासतीर्थ में प्रत्येक अमावस्या को स्नान करने से चन्द्रमा तेजस्वी और बलवान हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.35.85 
अमावास्यां महाराज नित्यश: शशलक्षण:।
स्नात्वा ह्याप्यायते श्रीमान् प्रभासे तीर्थ उत्तमे॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उत्तम प्रभासतीर्थ में प्रत्येक अमावस्या को स्नान करने से चन्द्रमा तेजस्वी और बलवान हो जाता है।
 
Maharaj! The moon becomes radiant and strong by taking bath on every Amavasya in Uttam Prabhastirtha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)