Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.35.7-8: नरेश्वर! परंतु राजा धृतराष्ट्र ने भगवान की बात नहीं मानी। यह सब पहले यथार्थ रूप से बताया जा चुका है। वहाँ संधि करने में सफल न होने पर महाबाहु पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण उपप्लव्य को लौट गए। 7-8॥ | mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च तत् कृतवान् राजा यथा ख्यातं हि तत् पुरा॥ ७॥
अनवाप्य शमं तत्र कृष्ण: पुरुषसत्तम:।
आगच्छत महाबाहुरुपप्लव्यं जनाधिप॥ ८॥
अनुवाद
नरेश्वर! परंतु राजा धृतराष्ट्र ने भगवान की बात नहीं मानी। यह सब पहले यथार्थ रूप से बताया जा चुका है। वहाँ संधि करने में सफल न होने पर महाबाहु पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण उपप्लव्य को लौट गए। 7-8॥
Nareshwar! But King Dhritarashtra did not listen to God's advice. All this has been explained realistically before. After not being successful in making a treaty there, the mighty-armed Purushottam Lord Shri Krishna returned back to Upplavya. 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥