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mahabharat 9.35.64-65h: चंद्रमा के क्षीण होने से अन्न तथा अन्य औषधियाँ उत्पन्न नहीं हुईं। उनका स्वाद, सार और प्रभाव नष्ट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.35.64-65h 
क्षीयमाणे तत: सोमे ओषध्यो न प्रजज्ञिरे॥ ६४॥
निरास्वादरसा: सर्वा हतवीर्याश्च सर्वश:।
 
 
अनुवाद
चंद्रमा के क्षीण होने से अन्न तथा अन्य औषधियाँ उत्पन्न नहीं हुईं। उनका स्वाद, सार और प्रभाव नष्ट हो गया।
 
Due to the weakening of the moon, food and other medicinal herbs were not produced. Their taste, essence and effect were destroyed. 64 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)