श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  9.35.46 
नक्षत्रयोगनिरता: संख्यानार्थं च ताभवन्।
पत्न्यो वै तस्य राजेन्द्र सोमस्य शुभकर्मण:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! शुभ कर्म करने वाले सोम की वे पत्नियाँ काल की गणना के लिए नक्षत्रों से सम्बन्ध रखने के कारण इसी नाम से प्रसिद्ध हुईं।
 
Rajendra! Those wives of Som, the doer of auspicious deeds, became famous by the same name because of their relation with the stars for calculation of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)