Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.35.43: जनमेजय ने पूछा - हे प्रभु ! चन्द्रमा को राजसी ज्वर कैसे हुआ और उन्होंने उस तीर्थ में किस प्रकार स्नान किया ? 43॥   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.35.43 
जनमेजय उवाच
कथं तु भगवन् सोमो यक्ष्मणा समगृह्यत।
कथं च तीर्थप्रवरे तस्मिंश्चन्द्रो न्यमज्जत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे प्रभु ! चन्द्रमा को राजसी ज्वर कैसे हुआ और उन्होंने उस तीर्थ में किस प्रकार स्नान किया ? 43॥
 
Janamejaya asked – Lord! How did Chandrama suffer from royal fever and how did he take bath in that sacred place? 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)