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वैशम्पायन उवाच
तीर्थानां च फलं राजन् गुणोत्पत्तिं च सर्वश:।
मयोच्यमानं वै पुण्यं शृणु राजेन्द्र कृत्स्नश:॥ ४०॥
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! मैं आपसे तीर्थों के गुण, प्रभाव, उत्पत्ति और पुण्य के विषय में कह रहा हूँ। आप ध्यानपूर्वक यह सब सुनें।"
Vaishampayana said, "O King! I am telling you about the qualities, effects, origin and merits of visiting holy places. Listen to all this carefully." 40.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥