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श्लोक  9.35.40 
वैशम्पायन उवाच
तीर्थानां च फलं राजन् गुणोत्पत्तिं च सर्वश:।
मयोच्यमानं वै पुण्यं शृणु राजेन्द्र कृत्स्नश:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, "हे राजन! मैं आपसे तीर्थों के गुण, प्रभाव, उत्पत्ति और पुण्य के विषय में कह रहा हूँ। आप ध्यानपूर्वक यह सब सुनें।"
 
Vaishampayana said, "O King! I am telling you about the qualities, effects, origin and merits of visiting holy places. Listen to all this carefully." 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)