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श्लोक  9.35.28 
वासांसि च महार्हाणि पर्यङ्कास्तरणानि च।
पूजार्थं तत्र क्लृप्तानि विप्राणां सुखमिच्छताम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सुख चाहने वाले ब्राह्मणों के स्वागत के लिए बहुमूल्य वस्त्र, शय्या और बिछावन तैयार रखे गए थे।
 
Precious clothes, beds and beddings were kept ready to welcome the pleasure-seeking Brahmins. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)