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mahabharat 9.35.23-24: राजा! उस समय उन्होंने हर देश में थके-मांदे, बीमार, बच्चों और वृद्धों के स्वागत के लिए तरह-तरह की चीजें बहुतायत में तैयार कर रखी थीं।   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.35.23-24 
श्रान्तानां क्लान्तवपुषां शिशूनां विपुलायुषाम्॥ २३॥
देशे देशे तु देयानि दानानि विविधानि च।
अर्चायै चार्थिनां राजन् क्लृप्तानि बहुशस्तथा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस समय उन्होंने हर देश में थके-मांदे, बीमार, बच्चों और वृद्धों के स्वागत के लिए तरह-तरह की चीजें बहुतायत में तैयार कर रखी थीं।
 
King! At that time, he had prepared a variety of things in abundance to welcome the tired and sick, children and the aged people in every country.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)