Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.35.16-17: यात्रा करते समय बलरामजी स्वयं मार्ग में रुके और अपने सेवकों से कहा - 'तुम सब लोग शीघ्र ही द्वारका जाओ और वहाँ से तीर्थयात्रा के लिए आवश्यक सब सामग्री, सब आवश्यक उपकरण, अग्निहोत्र के लिए अग्नि और पुरोहितों को ले आओ।॥ 16-17॥   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  9.35.16-17 
गच्छन्नेव पथिस्थस्तु राम: प्रेष्यानुवाच ह॥ १६॥
सम्भारांस्तीर्थयात्रायां सर्वोपकरणानि च।
आनयध्वं द्वारकायामग्नीन् वै याजकांस्तथा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यात्रा करते समय बलरामजी स्वयं मार्ग में रुके और अपने सेवकों से कहा - 'तुम सब लोग शीघ्र ही द्वारका जाओ और वहाँ से तीर्थयात्रा के लिए आवश्यक सब सामग्री, सब आवश्यक उपकरण, अग्निहोत्र के लिए अग्नि और पुरोहितों को ले आओ।॥ 16-17॥
 
While travelling, Balarama himself stayed on the way and said to his servants, 'You all go to Dwarka quickly and bring from there all the materials required for the pilgrimage, all the necessary equipments, the fire for Agnihotra and the priests.॥ 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)