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mahabharat 9.35.13: इससे क्रुद्ध और दुःखी होकर महायदुनन्दन हलधर सरस्वती के तट पर तीर्थयात्रा के लिए चल पड़े ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 9.35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.35.13 
ततो मन्युपरीतात्मा जगाम यदुनन्दन:।
तीर्थयात्रां हलधर: सरस्वत्यां महायशा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इससे क्रुद्ध और दुःखी होकर महायदुनन्दन हलधर सरस्वती के तट पर तीर्थयात्रा के लिए चल पड़े ॥13॥
 
Feeling angry and saddened by this, the great Yadunandan Haldhar set out on a pilgrimage to the banks of Saraswati. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)