Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.34.5-7h: उस समय बलरामजी ने श्रीकृष्ण, पाण्डवों तथा कुरुवंशी दुर्योधन को हाथ में गदा लिए खड़े देखकर कहा, 'माधव! मुझे तीर्थयात्रा पर निकले हुए बयालीस दिन हो गए हैं। मैं पुष्य नक्षत्र में चला था और श्रवण नक्षत्र में लौटा हूँ। मैं अपने दोनों शिष्यों के बीच गदायुद्ध देखना चाहता हूँ।' ॥5-6 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.34: बलरामजीका आगमन और स्वागत तथा भीमसेन और दुर्योधनके युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 34: बलरामजीका आगमन और स्वागत तथा भीमसेन और दुर्योधनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 5-7h
 
 
श्लोक  9.34.5-7h 
अब्रवीच्च तदा रामो दृष्ट्वा कृष्णं सपाण्डवम्।
दुर्योधनं च कौरव्यं गदापाणिमवस्थितम्॥ ५॥
चत्वारिंशदहान्यद्य द्वे च मे नि:सृतस्य वै।
पुष्येण सम्प्रयातोऽस्मि श्रवणे पुनरागत:॥ ६॥
शिष्ययोर्वै गदायुद्धं द्रष्टुकामोऽस्मि माधव।
 
 
अनुवाद
उस समय बलरामजी ने श्रीकृष्ण, पाण्डवों तथा कुरुवंशी दुर्योधन को हाथ में गदा लिए खड़े देखकर कहा, 'माधव! मुझे तीर्थयात्रा पर निकले हुए बयालीस दिन हो गए हैं। मैं पुष्य नक्षत्र में चला था और श्रवण नक्षत्र में लौटा हूँ। मैं अपने दोनों शिष्यों के बीच गदायुद्ध देखना चाहता हूँ।' ॥5-6 1/2॥
 
At that time Balarama looked at Shri Krishna, Pandavas and the Kuruvanshi Duryodhan standing with a mace in his hand and said, 'Madhava! It has been forty-two days since I set out for pilgrimage. I left in the Pushya constellation and have returned in the Shravan constellation. I want to see the mace fight between my two disciples.' ॥ 5-6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)