|
| |
| |
श्लोक 9.34.21-22  |
ततस्तयो: संनिपातस्तुमुलो लोमहर्षण:॥ २१॥
आसीदन्तकरो राजन् वैरस्य तव पुत्रयो:॥ २२॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे राजन! तत्पश्चात् आपके दोनों पुत्रों में भयंकर एवं रोमांचकारी युद्ध आरम्भ हुआ, जिससे उनका वैर-विरोध समाप्त हो गया ॥ 21-22॥ |
| |
| O King! Thereafter a fierce and thrilling battle began between your two sons which put an end to their enmity. ॥ 21-22॥ |
| |
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि गदापर्वणि बलदेवागमने चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें बलरामजीका आगमनविषयक चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥
|
| |
| ✨ ai-generated |
| |
|