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mahabharat 9.34.10-11h: राजन! माद्री के दोनों पराक्रमी पुत्र नकुल-सहदेव तथा द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी महाबली बलरामजी को प्रणाम करके उनके पास विनयपूर्वक खड़े हो गये।   |   mahabharat अध्याय 9.34: बलरामजीका आगमन और स्वागत तथा भीमसेन और दुर्योधनके युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 34: बलरामजीका आगमन और स्वागत तथा भीमसेन और दुर्योधनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  9.34.10-11h 
माद्रीपुत्रौ तथा शूरौ द्रौपद्या: पञ्च चात्मजा:॥ १०॥
अभिवाद्य स्थिता राजन् रौहिणेयं महाबलम्।
 
 
अनुवाद
राजन! माद्री के दोनों पराक्रमी पुत्र नकुल-सहदेव तथा द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी महाबली बलरामजी को प्रणाम करके उनके पास विनयपूर्वक खड़े हो गये।
 
Rajan! Madri's two valiant sons Nakul-Sahdev and Draupadi's five sons also bowed to the mighty Balramji and stood politely near him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)