श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 34: बलरामजीका आगमन और स्वागत तथा भीमसेन और दुर्योधनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  9.34.1-2 
संजय उवाच
तस्मिन् युद्धे महाराज सुसंवृत्ते सुदारुणे।
उपविष्टेषु सर्वेषु पाण्डवेषु महात्मसु॥ १॥
ततस्तालध्वजो रामस्तयोर्युद्ध उपस्थिते।
श्रुत्वा तच्छिष्ययो राजन्नाजगाम हलायुध:॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! जब वह अत्यन्त भयंकर युद्ध आरम्भ होने वाला था और समस्त महाबली पाण्डव उसे देखने के लिए बैठे हुए थे, उसी समय अपने दोनों शिष्यों के युद्ध का समाचार सुनकर कमल से अंकित ध्वजा धारण किए हुए हल चलाने वाले भगवान बलरामजी वहाँ आ पहुँचे।
 
Sanjaya says - Maharaj! When that extremely dreadful battle was about to commence and all the great Pandavas sat down to see it, at that time on hearing the news of the battle between his two disciples, Lord Balarama, the ploughman carrying a flag marked with a lotus, reached there. 1-2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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