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mahabharat 9.33.8-9h: राजन! यह तो ठीक है कि भीमसेन बलवान और समर्थ हैं, परन्तु राजा दुर्योधन ने अधिक अभ्यास किया है। एक ओर बलवान व्यक्ति हो और दूसरी ओर युद्ध का अभ्यासी हो, तो उनमें युद्ध का अभ्यास करने वाला ही बड़ा माना जाता है। 8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 8-9h
 
 
श्लोक  9.33.8-9h 
बली भीम: समर्थश्च कृती राजा सुयोधन:॥ ८॥
बलवान् वा कृती वेति कृती राजन् विशिष्यते।
 
 
अनुवाद
राजन! यह तो ठीक है कि भीमसेन बलवान और समर्थ हैं, परन्तु राजा दुर्योधन ने अधिक अभ्यास किया है। एक ओर बलवान व्यक्ति हो और दूसरी ओर युद्ध का अभ्यासी हो, तो उनमें युद्ध का अभ्यास करने वाला ही बड़ा माना जाता है। 8 1/2॥
 
King! It is true that Bhimsen is strong and capable, but King Duryodhana has practiced more. On one hand there is a strong person and on the other hand there is a practitioner of war, then among them the one who practices war is considered greater. 8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)