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mahabharat 9.33.57: राजा! जैसे लोग ताली बजाकर मतवाले हाथी को क्रोधित कर देते हैं, उसी प्रकार उसने बार-बार ताली बजाकर राजा दुर्योधन के युद्ध के प्रति हर्ष और उत्साह को बढ़ाया।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.33.57 
उन्मत्तमिव मातङ्गं तलशब्देन मानवा:।
भूय: संहर्षयामासू राजन् दुर्योधनं नृपम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
राजा! जैसे लोग ताली बजाकर मतवाले हाथी को क्रोधित कर देते हैं, उसी प्रकार उसने बार-बार ताली बजाकर राजा दुर्योधन के युद्ध के प्रति हर्ष और उत्साह को बढ़ाया।
 
King! Just as men enrage a drunken elephant by clapping, in the same way by clapping repeatedly he increased the joy and enthusiasm of King Duryodhana regarding the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)