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mahabharat 9.33.47: ‘तुम्हारे कुकर्मों के कारण आचार्य द्रोण, कर्ण, पराक्रमी शल्य और शत्रु उत्पन्न करने वाला शकुनि, ये सब युद्धभूमि में मारे गए हैं।॥ 47॥   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.33.47 
हतो द्रोणश्च कर्णश्च हत: शल्य: प्रतापवान्।
वैरस्य चादिकर्तासौ शकुनिर्निहतो रणे॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारे कुकर्मों के कारण आचार्य द्रोण, कर्ण, पराक्रमी शल्य और शत्रु उत्पन्न करने वाला शकुनि, ये सब युद्धभूमि में मारे गए हैं।॥ 47॥
 
‘Due to your misdeeds, Acharya Drona, Karna, the mighty Shalya and Shakuni, the creator of enmity, all have been killed on the battlefield.॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)