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mahabharat 9.33.44-45: दुष्ट! तूने पूरे दरबार में रजस्वला द्रौपदी को कष्ट पहुँचाया, ज्योतिषी की सलाह मानकर छल से राजा युधिष्ठिर को जुए में हरा दिया तथा निर्दोष कुंतीपुत्रों पर अनेक पाप और अत्याचार किए। आज तू इन सबका भयंकर परिणाम अपनी आँखों से देखेगा।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  9.33.44-45 
द्रौपदी च परिक्लिष्टा सभामध्ये रजस्वला।
द्यूते यद् विजितो राजा शकुनेर्बुद्धिनिश्चयात्॥ ४४॥
यानि चान्यानि दुष्टात्मन् पापानि कृतवानसि।
अनाग:सु च पार्थेषु तस्य पश्य महत् फलम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट! तूने पूरे दरबार में रजस्वला द्रौपदी को कष्ट पहुँचाया, ज्योतिषी की सलाह मानकर छल से राजा युधिष्ठिर को जुए में हरा दिया तथा निर्दोष कुंतीपुत्रों पर अनेक पाप और अत्याचार किए। आज तू इन सबका भयंकर परिणाम अपनी आँखों से देखेगा।
 
Evil man! In the presence of the entire court you caused pain to the menstruating Draupadi, took the advice of the diviner and deceitfully defeated King Yudhishthira in gambling and committed various other sins and atrocities on the innocent sons of Kunti. Today you will see with your own eyes the terrible consequences of all these.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)