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mahabharat 9.33.41: उस समय दुर्योधन के मन में न तो कोई घबराहट थी, न कोई भय, न कोई पश्चाताप, न कोई पीड़ा। वह युद्धभूमि में सिंह की भाँति निर्भय होकर खड़ा था।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.33.41 
न सम्भ्रमो न च भयं न च ग्लानिर्न च व्यथा।
आसीद् दुर्योधनस्यापि स्थित: सिंह इवाहवे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उस समय दुर्योधन के मन में न तो कोई घबराहट थी, न कोई भय, न कोई पश्चाताप, न कोई पीड़ा। वह युद्धभूमि में सिंह की भाँति निर्भय होकर खड़ा था।
 
At that time, there was no panic or fear in Duryodhan's mind. There was no remorse or pain. He stood fearlessly like a lion on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)