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mahabharat 9.33.40: जिस प्रकार मतवाला हाथी अपने समूह से अलग हो जाता है, उसी प्रकार आपके पराक्रमी पुत्र दुर्योधन को अकेला आते देख समस्त पाण्डव हर्ष से भर गये।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  9.33.40 
तमेकाकिनमासाद्य धार्तराष्ट्रं महाबलम्।
वियूथमिव मातङ्गं समहृष्यन्त पाण्डवा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार मतवाला हाथी अपने समूह से अलग हो जाता है, उसी प्रकार आपके पराक्रमी पुत्र दुर्योधन को अकेला आते देख समस्त पाण्डव हर्ष से भर गये।
 
Just as a drunken elephant gets separated from its herd, similarly all the Pandavas were filled with joy on finding your mighty son Duryodhana coming alone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)