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mahabharat 9.33.37: यह कहकर भरतश्रेष्ठ वीर भीमसेन ने अपनी गदा उठाई और युद्ध के लिए खड़े हो गए। जिस प्रकार इंद्र ने वृत्रासुर को ललकारा था, उसी प्रकार उन्होंने दुर्योधन का आह्वान किया।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.33.37 
इत्युक्त्वा भरतश्रेष्ठो गदामुद्यम्य वीर्यवान्।
उदतिष्ठत युद्धाय शक्रो वृत्रमिवाह्वयन्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर भरतश्रेष्ठ वीर भीमसेन ने अपनी गदा उठाई और युद्ध के लिए खड़े हो गए। जिस प्रकार इंद्र ने वृत्रासुर को ललकारा था, उसी प्रकार उन्होंने दुर्योधन का आह्वान किया।
 
Having said this, Bhimasena, the best of the Bharata heroes, picked up his mace and stood up for the battle. Just as Indra had challenged Vritraasura, in the same manner he invoked Duryodhana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)