Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.33.3: राजा! आपने ऐसी दुस्साहस भरी बात क्यों कही कि ‘आप हम में से किसी एक को मारकर कौरवों के राजा बन सकते हैं?’॥3॥   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.33.3 
किमिदं साहसं राजंस्त्वया व्याहृतमीदृशम्।
एकमेव निहत्याजौ भव राजा कुरुष्विति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा! आपने ऐसी दुस्साहस भरी बात क्यों कही कि ‘आप हम में से किसी एक को मारकर कौरवों के राजा बन सकते हैं?’॥3॥
 
King! Why did you say such a daring thing that 'you can kill just one of us and become the king of the Kauravas'?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)