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mahabharat 9.33.29-30: राजन! तत्पश्चात् सत्य ने पाण्डुपुत्र भीमसेन की बहुत प्रशंसा की। धर्मराज, पाण्डव तथा पांचाल सभी ने भीमसेन के उस वचन का बहुत आदर किया।   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  9.33.29-30 
ततस्तु सात्यकी राजन् पूजयामास पाण्डवम्॥ २९॥
पञ्चाला: पाण्डवेयाश्च धर्मराजपुरोगमा:।
तद् वचो भीमसेनस्य सर्व एवाभ्यपूजयन्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् सत्य ने पाण्डुपुत्र भीमसेन की बहुत प्रशंसा की। धर्मराज, पाण्डव तथा पांचाल सभी ने भीमसेन के उस वचन का बहुत आदर किया।
 
Rajan! Thereafter, Satya praised Pandu's son Bhimsen a lot. Dharamraj, Pandavas and Panchals all respected that word of Bhimsen very much. 29-30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)