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mahabharat 9.33.21-22h: जनार्दन! आप सब लोग दर्शक बनकर मेरा युद्ध देखते रहें। श्रीकृष्ण! मैं युद्धस्थल में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर तीनों लोकों के देवताओं से युद्ध कर सकता हूँ; फिर इस सुयोधन की क्या आवश्यकता है?   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  9.33.21-22h 
भवन्त: प्रेक्षका: सर्वे मम सन्तु जनार्दन।
सामरानपि लोकांस्त्रीन् नानाशस्त्रधरान् युधि॥ २१॥
योधयेयं रणे कृष्ण किमुताद्य सुयोधनम्।
 
 
अनुवाद
जनार्दन! आप सब लोग दर्शक बनकर मेरा युद्ध देखते रहें। श्रीकृष्ण! मैं युद्धस्थल में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर तीनों लोकों के देवताओं से युद्ध कर सकता हूँ; फिर इस सुयोधन की क्या आवश्यकता है?
 
Janardan! All of you should remain spectators and keep watching my battle. Shri Krishna! I can fight with the gods of the three worlds along with those who are armed with various types of weapons in the battlefield; then what is the point of this Suyodhan?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)