Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.33.16-17h: फिर भी आपने बार-बार कहा है कि ‘आप हममें से किसी एक को भी मारकर राजा बन सकते हैं।’ निश्चय ही राजा पाण्डु और कुन्तीदेवी की सन्तान राज्य भोगने की अधिकारी नहीं है। विधाता ने उसे केवल अनन्त काल तक वनवास या भिक्षा मांगने के लिए ही उत्पन्न किया है।’॥16 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकं वास्मान् निहत्य त्वं भव राजेति वै पुन:।
नूनं न राज्यभागेषा पाण्डो: कुन्त्याश्च संतति:॥ १६॥
अत्यन्तवनवासाय सृष्टा भैक्ष्याय वा पुन:।
अनुवाद
फिर भी आपने बार-बार कहा है कि ‘आप हममें से किसी एक को भी मारकर राजा बन सकते हैं।’ निश्चय ही राजा पाण्डु और कुन्तीदेवी की सन्तान राज्य भोगने की अधिकारी नहीं है। विधाता ने उसे केवल अनन्त काल तक वनवास या भिक्षा मांगने के लिए ही उत्पन्न किया है।’॥16 1/2॥
‘Yet you have repeatedly said that ‘You can kill even one of us and become a king.’ Certainly, the child of King Pandu and Kuntidevi is not entitled to enjoy the kingdom. The creator has created him only to live in exile for eternity or to beg.’॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥