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mahabharat 9.33.12: मैं संसार में ऐसा कोई योद्धा नहीं देखता, यहाँ तक कि देवता भी नहीं, जो आज युद्धभूमि में गदाधारी दुर्योधन को परास्त कर सके॥12॥   |   mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.33.12 
न हि पश्यामि तं लोके योऽद्य दुर्योधनं रणे।
गदाहस्तं विजेतुं वै शक्त: स्यादमरोऽपि हि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैं संसार में ऐसा कोई योद्धा नहीं देखता, यहाँ तक कि देवता भी नहीं, जो आज युद्धभूमि में गदाधारी दुर्योधन को परास्त कर सके॥12॥
 
I do not see any warrior in the world, not even a demigod, who would be capable of defeating the mace-wielding Duryodhana on the battlefield today.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)