Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.33.10-11: ऐसा कौन पुरुष होगा जो अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पाकर जब केवल एक ही शेष रह जाए और वह भी संकट में पड़ जाए, तब अपना राज्य उस पर दांव लगाकर उसे हार जाए और इस प्रकार केवल एक से युद्ध करने की शर्त रखकर उससे युद्ध करना पसन्द करे?॥10-11॥ | mahabharat अध्याय 9.33: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको फटकारना, भीमसेनकी प्रशंसा तथा भीम और दुर्योधनमें वाग्युद्ध । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
को नु सर्वान् विनिर्जित्य शत्रूनेकेन वैरिणा॥ १०॥
कृच्छ्रप्राप्तेन च तथा हारयेद् राज्यमागतम्।
पणित्वा चैकपाणेन रोचयेदेवमाहवम्॥ ११॥
अनुवाद
ऐसा कौन पुरुष होगा जो अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पाकर जब केवल एक ही शेष रह जाए और वह भी संकट में पड़ जाए, तब अपना राज्य उस पर दांव लगाकर उसे हार जाए और इस प्रकार केवल एक से युद्ध करने की शर्त रखकर उससे युद्ध करना पसन्द करे?॥10-11॥
Who would be such a person who, after having conquered all his enemies and when only one is left and he too is in trouble, would stake his kingdom on him and lose it and thus prefer to fight with him by keeping the condition of fighting only one?॥ 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥