Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.32.7-9: संजय बोले - राजाओं के राजा ! हे राजन ! जब युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित उसे इस प्रकार फटकार लगाई, तब आपके पुत्र ने जल में खड़े होकर उन कठोर वचनों को सुनकर एक लंबी, गर्म साँस ली । राजा दुर्योधन संकट में था और जल में था; इसलिए वह बार-बार साँस ले रहा था । उसने जल के भीतर अपने दोनों हाथों को कई बार हिलाया और मन ही मन युद्ध करने का निश्चय करके राजा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा - ॥ 7-9॥ | mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय बोले - राजाओं के राजा ! हे राजन ! जब युधिष्ठिर ने अपने भाइयों सहित उसे इस प्रकार फटकार लगाई, तब आपके पुत्र ने जल में खड़े होकर उन कठोर वचनों को सुनकर एक लंबी, गर्म साँस ली । राजा दुर्योधन संकट में था और जल में था; इसलिए वह बार-बार साँस ले रहा था । उसने जल के भीतर अपने दोनों हाथों को कई बार हिलाया और मन ही मन युद्ध करने का निश्चय करके राजा युधिष्ठिर से इस प्रकार कहा - ॥ 7-9॥
Sanjaya said - King of kings! O King! When Yudhishthira, along with his brothers, rebuked him in this manner, your son, standing in the water, heaved a long, hot breath on hearing those harsh words. King Duryodhan was in a difficult situation and was in the water; therefore, he kept breathing again and again. He shook both his hands many times inside the water and decided to fight in his mind and said to King Yudhishthira in this manner -॥ 7-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥