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श्री महाभारत
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पर्व 9: शल्य पर्व
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अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना
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श्लोक 63
श्लोक
9.32.63
संजय उवाच
ततस्तव सुतो राजन् वर्म जग्राह काञ्चनम्।
विचित्रं च शिरस्त्राणं जाम्बूनदपरिष्कृतम्॥ ६३॥
अनुवाद
संजय कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् आपके पुत्र ने स्वर्ण-कवच तथा विचित्र स्वर्ण-जटित शिरोभूषण धारण किया ॥63॥
Sanjay says- Rajan! Thereafter, your son wore golden armor and a strange gold-studded headgear. 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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