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श्लोक 9.32.63  |
संजय उवाच
ततस्तव सुतो राजन् वर्म जग्राह काञ्चनम्।
विचित्रं च शिरस्त्राणं जाम्बूनदपरिष्कृतम्॥ ६३॥ |
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| अनुवाद |
| संजय कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात् आपके पुत्र ने स्वर्ण-कवच तथा विचित्र स्वर्ण-जटित शिरोभूषण धारण किया ॥63॥ |
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| Sanjay says- Rajan! Thereafter, your son wore golden armor and a strange gold-studded headgear. 63॥ |
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