श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 61-62
 
 
श्लोक  9.32.61-62 
इममेकं च ते कामं वीर भूयो ददाम्यहम्।
पञ्चानां पाण्डवेयानां येन त्वं योद्‍धुमिच्छसि॥ ६१॥
तं हत्वा वै भवान् राजा हतो वा स्वर्गमाप्नुहि।
ऋते च जीविताद् वीर युद्धे किं कर्म ते प्रियम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वीर! मैं तुम्हें पुनः अभीष्ट वर देता हूँ - 'यदि तुम जिन पाँच पाण्डवों से युद्ध करना चाहते हो, उनमें से किसी एक को मार डालो तो राजा बनोगे अथवा स्वयं मारे जाने पर स्वर्ग प्राप्त करोगे। वीर! युद्ध में तुम्हारे प्राण बचाने के अतिरिक्त तुम्हारा और कौन-सा प्रिय कार्य हम कर सकते हैं, यह बताओ?॥ 61-62॥
 
Brave! I once again grant you a desired boon – ‘If you kill any one of the five Pandavas with whom you wish to fight, you can become the king or if you are killed yourself, you will attain heaven. Brave! Tell me, apart from saving your life in the war, what other favourite work of yours can we do?॥ 61-62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)