श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  9.32.60 
आमुञ्च कवचं वीर मूर्धजान् यमयस्व च।
यच्चान्यदपि ते नास्ति तदप्यादत्स्व भारत॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
वीर भरतपुत्र! कवच पहन लो, केश ठीक से बाँध लो और जो भी युद्ध सामग्री तुम्हारे पास न हो, उसे ले लो।
 
Brave Bharata's son! Wear your armour, tie your hair properly and take any other war material that you do not have.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)