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mahabharat 9.32.59: प्रायः जब सभी प्राणी संकट में पड़ते हैं, तब रक्षा के लिए धर्मग्रंथों का आह्वान करते हैं और जब वे उच्च पद पर प्रतिष्ठित हो जाते हैं, तब उन्हें परलोक का द्वार बंद मिलता है ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  9.32.59 
सर्वो विमृशते जन्तु: कृच्छ्रस्थो धर्मदर्शनम्।
पदस्थ: पिहितं द्वारं परलोकस्य पश्यति॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
प्रायः जब सभी प्राणी संकट में पड़ते हैं, तब रक्षा के लिए धर्मग्रंथों का आह्वान करते हैं और जब वे उच्च पद पर प्रतिष्ठित हो जाते हैं, तब उन्हें परलोक का द्वार बंद मिलता है ॥59॥
 
Usually when all beings find themselves in trouble, they invoke the religious scriptures for protection and when they are established in a high position, they find the door to the next world closed. ॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)