श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  9.32.55 
युधिष्ठिर उवाच
मा भूदियं तव प्रज्ञा कथमेवं सुयोधन।
यदाभिमन्युं बहवो जघ्नुर्युधि महारथा:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "हे सुयोधन, जब तुमने तथा अन्य अनेक महारथियों ने युद्ध में अभिमन्यु का वध किया था, उस समय तुम्हारे मन में ऐसा विचार क्यों नहीं आया?"
 
Yudhishthira said, "O Suyodhan, when you and many other great warriors killed Abhimanyu in the war, why did such a thought not arise in your mind at that time?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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