श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  9.32.54 
अवश्यमेव योद्धव्यं सर्वैरेव मया सह।
युक्तं त्वयुक्तमित्येतद् वेत्सि त्वं चैव सर्वदा॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
मुझे तुम सब लोगों से अवश्य ही युद्ध करना पड़ेगा; परन्तु तुम लोग भली-भाँति जानते हो कि इसमें क्या उचित है और क्या अनुचित।
 
I will surely have to fight with all of you; but you always know well what is right and what is wrong in this. 54.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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