Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.32.53: विशेषतः, जो कवच उतारकर बैठा हो, जो थका हुआ हो और जल में गोता लगाकर विश्राम कर रहा हो, जिसके शरीर के सभी अंग बुरी तरह घायल हो गए हों, तथा जिसके वाहन और सैनिक मारे गए हों, ऐसे योद्धा को किसी भी समूह के साथ युद्ध करने के लिए बाध्य करना कभी उचित नहीं है ॥ 53॥ | mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विशेषतः, जो कवच उतारकर बैठा हो, जो थका हुआ हो और जल में गोता लगाकर विश्राम कर रहा हो, जिसके शरीर के सभी अंग बुरी तरह घायल हो गए हों, तथा जिसके वाहन और सैनिक मारे गए हों, ऐसे योद्धा को किसी भी समूह के साथ युद्ध करने के लिए बाध्य करना कभी उचित नहीं है ॥ 53॥
In particular, it is never appropriate to force a warrior who has taken off his armour, who is tired and is resting after diving in water, whose all body parts are severely injured, and whose vehicles and soldiers have been killed, to fight with any group. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥