श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  9.32.51 
स मेघनिनदो हर्षान्नर्दन्निव च गोवृष:।
आजुहाव तत: पार्थान् गदया युधि वीर्यवान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
वह वीर योद्धा बैल के समान गर्जना करता हुआ और मेघ के समान गर्जना करता हुआ बड़े हर्ष के साथ पाण्डवों को गदायुद्ध के लिए ललकारने लगा ॥51॥
 
That valiant warrior, roaring like a bull and roaring like a cloud, with great joy challenged the Pandavas for a mace-fight. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)