Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.32.5-6: इस समय वह सेवकों से रहित होकर एकान्त स्थान में पड़ा हुआ था। ऐसी स्थिति में, विशेषकर जब पाण्डवों ने उसे इतनी कठोर फटकार लगाई थी, तब शत्रुओं पर विजय से भरे हुए उन कठोर वचनों को बार-बार सुनकर दुर्योधन ने पाण्डवों से क्या कहा? यह मुझे बताओ। | mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तथा तर्ज्यमानस्तु पाण्डुपुत्रैर्विशेषत:।
विहीनश्च स्वकैर्भृत्यैर्निर्जने चावृतो भृशम्॥ ५॥
स श्रुत्वा कटुका वाचो जययुक्ता: पुन: पुन:।
किमब्रवीत् पाण्डवेयांस्तन्ममाचक्ष्व संजय॥ ६॥
अनुवाद
इस समय वह सेवकों से रहित होकर एकान्त स्थान में पड़ा हुआ था। ऐसी स्थिति में, विशेषकर जब पाण्डवों ने उसे इतनी कठोर फटकार लगाई थी, तब शत्रुओं पर विजय से भरे हुए उन कठोर वचनों को बार-बार सुनकर दुर्योधन ने पाण्डवों से क्या कहा? यह मुझे बताओ।
At this time he was bereft of his servants and was confined to a solitary place. In that condition, especially when the Pandavas rebuked him so severely, what did Duryodhan say to the Pandavas after hearing those harsh words repeatedly filled with victory over the enemies? Tell me this.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥