श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  9.32.4 
इयं च पृथिवी सर्वा सम्लेच्छाटविका भृशम्।
प्रसादाद् ध्रियते यस्य प्रत्यक्षं तव संजय॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय! तुमने अपनी आँखों से देखा है कि म्लेच्छ और वनवासी जातियों सहित यह सम्पूर्ण पृथ्वी केवल दुर्योधन की कृपा से ही बची हुई है।
 
Sanjaya! You have seen with your own eyes that this entire earth, including the mlechha and the forest tribes, survived only by the grace of Duryodhana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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