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mahabharat 9.32.38-39h: आपका पुत्र कंधे पर लोहे की गदा रखकर बंधे हुए जल को भेदकर तेजस्वी सूर्य के समान ऊपर उठ गया।   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.32.38-39h 
स भित्त्वा स्तम्भितं तोयं स्कन्धे कृत्वाऽऽयसीं गदाम्॥ ३८॥
उदतिष्ठत पुत्रस्ते प्रतपन् रश्मिवानिव।
 
 
अनुवाद
आपका पुत्र कंधे पर लोहे की गदा रखकर बंधे हुए जल को भेदकर तेजस्वी सूर्य के समान ऊपर उठ गया।
 
With an iron mace on his shoulder, your son, having pierced the bound water, rose up like the glorious Sun. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)