श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.32.35 
संजय उवाच
एतत् स नरशार्दूलो नामृष्यत तवात्मज:।
सलिलान्तर्गत: श्वभ्रे महानाग इव श्वसन्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! जल में खड़ा आपका पुत्र दुर्योधन युधिष्ठिर की यह बात सहन न कर सका। वह बिल में बैठे हुए विशाल सर्प के समान गहरी साँसें लेने लगा।
 
Sanjaya says - O King! Your son Duryodhan, who was standing in the water, could not tolerate this statement of Yudhishthira. He started taking deep breaths like a huge snake sitting in a hole.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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