श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  9.32.27-28h 
दुर्योधन उवाच
एकश्चेद् योद्‍धुमाक्रन्दे शूरोऽद्य मम दीयताम्॥ २७॥
आयुधानामियं चापि वृता त्वत्सम्मते गदा।
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "हे राजन, यदि ऐसी बात है तो मुझे इस महायुद्ध में मेरे साथ लड़ने के लिए कोई एक वीर योद्धा दे दीजिए और आपकी सलाह के अनुसार मैंने इस गदा को ही अपना अस्त्र चुना है।"
 
Duryodhan said, "O King, if this is the case then give me any one brave warrior to fight with me in this great war and as per your advice, I have chosen only this mace as my weapon."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas